सुबह होटल में ताज़ा नाश्ता करने के बाद, सीधे निकलें और द्वारकाधीश मंदिर के प्राचीन गर्भगृह की शांत वंदना में शामिल हों, जहाँ दर्शन के बाद आप मंदिर के आसपास के पारंपरिक बाजारों में हथकरघा और स्थानीय प्रसाद देख-खरीद सकते हैं। उसके बाद थोड़ी पैदल सैर कर के समुद्र तट की ओर जाएँ और रामेश्वर समुद्र तट पर ताजी समुद्री हवा में परिवार के साथ आराम करें तथा बच्चों को तट पर खेलते हुए ताजगी भरा समय दें।
दोपहर में परिवार साथ नारायण शादी महल के आसपास खाने-पीने के ठिकानों में से किसी पारंपरिक गुजराती थाली का आनंद लें, फिर हज़ारों साल पुराने राख्तेश्वर के पास स्थित गोपीनाथ टापू (गोपीनाथ द्वीप) की नाव यात्रा करें जहाँ बच्चे किनारे की लहरों और चट्टानों के पास खेल सकते हैं। शाम होते-होते गुड्डा बाज़ार में लोककला और हल्दी-लाल पिसे हुए मसालों की खरीदारी करें और समुद्री भोजन के छोटे स्टॉल पर ताज़ा पकवान चखकर दिन को हल्का-फुल्का समापन दें।
सूर्यास्त से पहले परिवार के साथ धर्मराज रोड के किनारे स्थित प्राचीन प्रकाशित मठ पहुँचें जहाँ शाम की आरती का शांत माहौल मिलता है; बच्चे और बुजुर्ग दोनों आराम से बैठकर आरती के गीतों का आनंद ले सकते हैं। उसके बाद लक्जरी या स्थानीय कैफे में बैठ कर नया बाजार चौक के पास गुजराती स्नैक्स और ठंडा शर्बत चखें, तथा हल्की-फुल्की सैर के लिए पास की रोशनी वाली पैदल गलियों में लोक-धर्म और हस्तकला की झलकियाँ देखें।
सुबह की शुरुआत करें ब्रजभूमि आश्रम की शांत प्रार्थना और बगीचे में हल्की पैदल सैर के साथ, जहाँ परिवार प्रकृति और धार्मिक शांतिदायक वातावरण का आनंद ले सकता है। उसके बाद जाएँ जलाराम मंदिर और पास के बोल तळाव के किनारे पर, जहाँ बच्चों के लिए घोड़े की सवारी और परिवार के साथ नाव की छोटी सैर उपलब्ध है, और स्थानीय ठेले पर मिलने वाले ताजे समोसे व नारियल पानी से ऊर्जा पुनः प्राप्त करें।
दोपहर में परिवार के साथ ध्वज स्थापना चौक के पास स्थित पारंपरिक रेस्तराँ में हल्की गुजराती थाली का आनंद लें, फिर विजिट करें गौतम मठ और पवित्र कुंड जहाँ बच्चों के लिए खुली अवधियों में स्थानीय कथा-कहानियाँ और गायों की आहार-देखभाल देखने को मिलती है; इसके बाद नाव से जाएँ सुदर्शन मंदिर के किनारे का छोटा प्राकृतिक उद्यान जहाँ छायादार बैंचों पर बैठ कर समुद्र की ठंडी हवा और पारिवारिक तस्वीरें ली जा सकती हैं।
शाम को परिवार के साथ शांत मूड बनाकर जाएँ कर्ण टीवी टावर के नज़दीकी प्रेक्षण कोठरी जहाँ से सूर्यास्त में सागर और शहर दोनों का विस्तृत नज़ारा मिलता है; ऊपर से फोटो लेने और बच्चों को दूर के रोशनी भरे दृश्यों को दिखाने का आनंद लें। इसके बाद निकट ही स्थित मछुआरा घाट पर लोकसंगीत और ताज़ा पकवानों के स्टॉलों का आनंद लें-यहाँ की छोटी-छोटी नावों की सैर और पत्तल पर परोसे गए समुद्री स्नैक्स परिवार के लिए खास अनुभव बनेगा।
सुबह जल्दी निकलकर मोटेरा से राष्ट्रीय राजमार्ग पर ड्राइव करते हुए रास्ते में एक छोटा विश्राम लें और वेरावल के पास के स्थानीय ढाबा पर स्वादिष्ट गुजराती ब्रेकफास्ट का आनंद लें; यह परिवार को ऊर्जा देगा और यात्रामाध्यम में बच्चों के लिए stretching का मौका देगा। सोमनाथ पहुँच कर सीधे जाएँ सोमनाथ समुद्री तीर्थ परिसर के पास स्थित प्राचीन कालीन लाइटहाउस पार्क में पैदल सैर और ताज़ा समुद्री हवा का आनंद लें, फिर तैयारी करके शांत समय में सोमनाथ मंदिर के मुख्य गर्भगृह में दर्शन और पारिवारिक आरती में शामिल हों।
दोपहर में परिवार साथ आराम से लंच के बाद जाएँ चांदी की चौक / लोक बाजार जहाँ स्थानीय हस्तशिल्प और समुद्री स्मृति चिन्ह देखे जा सकते हैं; बच्चे यहाँ रंगीन गुड़ियों और शंख-आभूषणों में रुचि लेंगे और आप ताज़ा नारियल पानी का आनंद ले सकते हैं। इसके बाद छोटे वॉक के लिए निकलें और प्रकाश मंदिर के पास स्थित समुद्री किनारा पार्क में बैठकर लहरों की आवाज़ में आराम करें तथा परिवार के साथ संग्रह के लिए सुंदर तटीय तस्वीरें लें।
शाम होते-होते परिवार के साथ शांत समंदर किनारे की सैर के लिए प्रभु पारिसर के पास स्थित समुद्री वॉकवे पर जाएँ जहाँ हल्की ब्रीज़ में बच्चे पंखे उड़ाकर खेल सकते हैं और परिवार साथ तस्वीरें ले सकता है; पास में ही स्थित शिल्पी चौक पर रुककर स्थानीय कारीगरों के माध्यम से बनी शंख-आभूषण और तैलीय चित्र खरीदें। उसके बाद सूर्यास्त के बाद प्रकाशित जलप्रपात चौका के नज़दीकी छोटे कैफे में बैठकर गरम मसालेदार चाय या ताज़ा फルーツ जूस का आनंद लें और दिन भर के तीर्थ-यात्रा की सुखद यादों पर बात करें।
सुबह की ताज़गी में परिवार के साथ पहले जाएँ त्रिवेणी बलीज (त्रिवेणी तट) पर जहाँ सुनहरे सूर्योदय और तीन नदियों के मिलने के दृश्य के बीच समुद्र के किनारे शांत प्रार्थना और छोटे-छोटे शंख व स्मृति-चिन्ह खरीदने का मौका मिलेगा; बच्चों को तट पर सिक्के ढूँढना और हल्की रेत की किले बनाना पसंद आएगा। उसके बाद निकट ही स्थित बाबा मोडक स्मारक गार्डन में पिकनिक-शैली नाश्ता करें, यहाँ की छायादार बैंचों पर चाय और स्थानीय नमकीन का आनंद लेते हुए परिवार वापसी की तैयारी और दिन भर के सफर की स्मृतियाँ साझा कर सकता है।
दोपहर में परिवार साथ आराम से लंच के बाद जाएँ जयसमंद झील के छोटे घाट पर - यहाँ की ठंडी छाँव में बोटिंग का आनंद लें और झील के किनारे पिकनिक-स्तर पर स्थानीय तली हुई मछली व नारियल पानी चखें। उसके बाद एक सांस्कृतिक ठहराव के लिए त्रिरत्न संग्रहालय (लोक कला केंद्र) में जाएँ जहाँ बच्चों को स्थानीय मिट्टी और शंख कला बनाने की वर्कशॉप में हिस्सा लेकर स्मृति-चिन्ह तैयार करने का मज़ा मिलेगा, और परिवार के लिए यात्रा के अंतिम दिन की यादगार तस्वीरों के साथ धीरे-धीरे वापसी की तैयारियाँ शुरू करें।
शाम को परिवार के साथ एक शांत सांस्कृतिक अनुभव के लिए जाएँ चोरवाड़ा फिशिंग हार्बर के पास स्थित लोक संगीत मंच जहाँ स्थानीय मत्स्यकर्मियों के गीत और धीमी लहरों की पृष्ठभूमि में परिवार आराम से बैठकर सुन सकता है; बच्चे किनारे पर छोटी मछलियाँ देखते हुए खुश होंगे। उसके बाद निकटवर्ती गौतम चौपाटी पारिवारिक पैलेस पार्क में टहलें, जहाँ खेल के उपकरण और बैंचों पर बैठकर समुद्र की ठंडी हवा में गरम राजस्थानी चाय या स्थानीय फलों का जूस लें और वापसी-यात्रा की तैयारियों पर मिलकर चर्चा करें।