वृंदावन के इस यात्रा का आगाज करें राधारानी और श्रीकृष्ण के पवित्र मंदिर के दर्शन करके। सुबह में मंदिर के पास वृंदावन के धामी भजनों का आनंद उठाएं। दोपहर में, गोपियों की प्रेम कहानियों को याद करते हुए श्रीकृष्ण जी के लीला स्थलों की यात्रा करें। शाम को, गोपाल मंदिर में श्रीकृष्ण की आराधना करें और आरती के समय उनकी मधुर लीला सुनें।
प्रातःकाल में इस यात्रा को नंदगांव जा कर श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर ध्यान दें। यहाँ वृंदावन के श्रीकृष्ण जी का जन्म स्थल है। दोपहर में, श्रीमती तुलसीदास जी की गुप्त गुफा का दौरा करें और उनके रचनाओं के प्रशंसकों के बीच एक शानदार संध्या आयोजित करें। शाम को गोविन्द देव जी के मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ श्रीकृष्ण की आराधना करें।
सुबह को ताटिया स्थान पर श्री बांके बिहारी जी के ध्यान में समाधि लें। इसे वृंदावन का चरण धूली माना जाता है। दोपहर में, वृंदावन के दिल में बसने वाले गोपियों के संगीत का आनंद लें। शाम को महाराजा बांके बिहारी जी के मंदिर में जाएं और उनकी आराधना करें।
प्रातःकाल में वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में भगवान की आराधना करें और पुष्पांजलि चढ़ाएं। दोपहर में, वृंदावन के निकटस्थ गांधी आश्रम पहुँचें और प्रकृति से गहरी शांति के लिए ध्यान करें। शाम को, गोपीनाथ मंदिर में श्रीकृष्ण की आराधना करें और उनके संगीत का आनंद लें।
उठते ही वर्षा वन में श्री राधारमण जी के ध्यान में समाधि लें। यह वन वृंदावन की सुंदरता का प्रतीक है। दोपहर में, वृंदावन के गोविन्द गाँव में स्थित गोपालपुर का दौरा करें और देखें कि श्रीकृष्ण की गोपियाँ कैसे रंग बदलती हैं। शाम को, वृंदावन के बांके बिहारी जी मंदिर में जाकर उनकी आराधना करें।
प्रातःकाल में, वृंदावन के निकटस्थ माथुरा के जाकर श्री कृष्ण जी के जन्म स्थल पर जाएं। यहाँ गृह प्रवेश के समय की कथा को याद करें। दोपहर में माथुरा की धरोहरी कला को देखें और पुष्पांजलि चढ़ाएं। शाम को, बांके बिहारी जी के दरबार में जाएं और उनकी आराधना करें।